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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
द्वन्द्वैस्तैस्तैरुपहतः सर्वतः परिशङ्कितः |  १५१   क
वहुप्रत्यर्थिकं राज्यमुपास्ते गणय़न्निशाः ||  १५१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति