शान्ति पर्व  अध्याय ३०८

भीष्म उवाच

साहमेतानि कर्माणि राज्यदुःखानि मैथिल |  १६१   क
समर्था शतशो वक्तुमथ वापि सहस्रशः ||  १६१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति