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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
स गार्हस्थ्याच्च्युतश्च त्वं मोक्षं नावाप्य दुर्विदम् |  १७५   क
उभय़ोरन्तराले च वर्तसे मोक्षवातिकः ||  १७५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति