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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
नाभिषज्जति कस्मिंश्चिन्नानर्थे न परिग्रहे |  ३५   क
नाभिरज्यति चैतेषु व्यर्थत्वाद्रागदोषय़ोः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति