आदि पर्व  अध्याय १४७

वैशम्पाय़न उवाच

अनाथा कृपणा वाला यत्रक्वचनगामिनी |  १२   क
भविष्यामि त्वय़ा तात विहीना कृपणा वत ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति