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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
सौकुमार्यं तथा रूपं वपुरग्र्यं तथा वय़ः |  ५४   क
तवैतानि समस्तानि निय़मश्चेति संशय़ः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति