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अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
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भीष्म उवाच
शुभे पात्रे ये गुणा गोप्रदाने; तावान्दोषो व्राह्मणस्वापहारे |  २१   क
सर्वावस्थं व्राह्मणस्वापहारो; दाराश्चैषां दूरतो वर्जनीय़ाः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति