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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
अथ वापि स्वतन्त्रासि स्वदोषेणेह केनचित् |  ६४   क
यदि किञ्चिच्छ्रुतं तेऽस्ति सर्वं कृतमनर्थकम् ||  ६४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति