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शान्ति पर्व
अध्याय १४
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वैशम्पाय़न उवाच
एतेषां यतमानानामुत्पद्यन्ते तु सम्पदः |  ३६   क
त्वं तु सर्वां महीं लव्ध्वा कुरुषे स्वय़मापदम् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति