शान्ति पर्व  अध्याय ३०८

भीष्म उवाच

नवभिर्नवभिश्चैव दोषैर्वाग्वुद्धिदूषणैः |  ७८   क
अपेतमुपपन्नार्थमष्टादशगुणान्वितम् ||  ७८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति