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शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
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भीष्म उवाच
अव्यक्तप्रकृतिरय़ं कलाशरीरः; सूक्ष्मात्मा क्षणत्रुटिशो निमेषरोमा |  २४   क
ऋत्वास्यः समवलशुक्लकृष्णनेत्रो; मांसाङ्गो द्रवति वय़ोहय़ो नराणाम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति