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शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
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भीष्म उवाच
अनेकपारिपन्थिके विरूपरौद्ररक्षिते |  ५६   क
स्वमेव कर्म रक्ष्यतां स्वकर्म तत्र गच्छति ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति