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शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
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भीष्म उवाच
प्रय़ुक्तय़ोः कर्मपथि स्वकर्मणोः; फलं प्रय़ोक्ता लभते यथाविधि |  ७८   क
निहीनकर्मा निरय़ं प्रपद्यते; त्रिविष्टपं गच्छति धर्मपारगः ||  ७८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति