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शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
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भीष्म उवाच
धनेन किं यन्न ददाति नाश्नुते; वलेन किं येन रिपून्न वाधते |  ९१   क
श्रुतेन किं येन न धर्ममाचरे; त्किमात्मना यो न जितेन्द्रिय़ो वशी ||  ९१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति