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अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
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भीष्म उवाच
स्वमांसं परमांसेन यो वर्धय़ितुमिच्छति |  ३४   क
उद्विग्नवासे वसति यत्रतत्राभिजाय़ते ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति