अनुशासन पर्व  अध्याय ३१

भीष्म उवाच

स पालय़न्नेव महीं धर्मात्मा काशिनन्दनः |  १४   क
तैर्वीतहव्यैरागत्य युधि सर्वैर्विनिर्जितः ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति