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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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सञ्जय़ उवाच
पपात महती चोल्का आदित्यान्निर्गतेव ह |  ११   क
दीपय़न्तीव तापेन शंसन्तीव महद्भय़म् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति