अनुशासन पर्व  अध्याय ३१

राजो उवाच

अनुजानीहि मां व्रह्मन्ध्याय़स्व च शिवेन माम् |  ५२   क
त्याजितो हि मय़ा जातिमेष राजा भृगूद्वह ||  ५२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति