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सभा पर्व
अध्याय ३१
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्सदः पार्थिवैः कीर्णं व्राह्मणैश्च महात्मभिः |  २५   क
भ्राजते स्म तदा राजन्नाकपृष्ठमिवामरैः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति