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विराट पर्व
अध्याय ३१
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वैशम्पाय़न उवाच
उदतिष्ठद्रजो भौमं न प्रज्ञाय़त किञ्चन |  ५   क
पक्षिणश्चापतन्भूमौ सैन्येन रजसावृताः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति