भीष्म पर्व  अध्याय ३१

श्रीभगवानु उवाच

सर्वभूतानि कौन्तेय़ प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् |  ७   क
कल्पक्षय़े पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति