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द्रोण पर्व
अध्याय ३१
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सञ्जय़ उवाच
तं शरौघमहावर्तं शोणितोदं महाह्रदम् |  ४२   क
तीर्णः संशप्तकान्हत्वा प्रत्यदृश्यत फल्गुनः ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति