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वन पर्व
अध्याय ३४
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वैशम्पाय़न उवाच
मोक्षो वा परमं श्रेय़ एष राजन्सुखार्थिनाम् |  ४२   क
प्राप्तिर्वा वुद्धिमास्थाय़ सोपाय़ं कुरुनन्दन ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति