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द्रोण पर्व
अध्याय ३१
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सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनं द्वादशभिर्द्रौणिं चाष्टाभिराशुगैः |  ५   क
आरावं तुमुलं कुर्वन्नभ्यवर्तत तान्रणे ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति