विराट पर्व  अध्याय २३

वैशम्पाय़न उवाच

ततस्ता नर्तनागाराद्विनिष्क्रम्य सहार्जुनाः |  १८   क
कन्या ददृशुराय़ान्तीं कृष्णां क्लिष्टामनागसम् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति