आदि पर्व  अध्याय ९

सूत उवाच

नापराध्यामि ते किञ्चिदहमद्य तपोधन |  २२   क
संरम्भात्तत्किमर्थं मामभिहंसि रुषान्वितः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति