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कर्ण पर्व
अध्याय ३१
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शल्य उवाच
दृश्यन्त एते कार्ष्णेय़ाः पञ्च पञ्चाचला इव |  ६६   क
व्यवस्थिता योत्स्यमानाः सर्वेऽर्जुनसमा युधि ||  ६६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति