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शान्ति पर्व
अध्याय ८३
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मुनिरु उवाच
ज्ञात्वा नय़ानपाय़ांश्च भृत्यतस्ते भय़ानि च |  २३   क
भक्त्या वृत्तिं समाख्यातुं भवतोऽन्तिकमागमम् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति