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शल्य पर्व
अध्याय ३१
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सञ्जय़ उवाच
एतत्स नरशार्दूलो नामृष्यत तवात्मजः |  ३३   क
सलिलान्तर्गतः श्वभ्रे महानाग इव श्वसन् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति