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शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
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श्रीभगवानु उवाच
मन्वन्तरेषु पुत्र त्वमेवं लोकप्रवर्तकः |  ४१   क
भविष्यस्यचलो व्रह्मन्नप्रधृष्यश्च नित्यशः ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति