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शान्ति पर्व
अध्याय ३१०
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भीष्म उवाच
तत्र रुद्रो महादेवः कर्णिकारमय़ीं शुभाम् |  २०   क
धारय़ाणः स्रजं भाति ज्योत्स्नामिव निशाकरः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति