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शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
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भीष्म उवाच
स मोक्षमनुचिन्त्यैव शुकः पितरमभ्यगात् |  १   क
प्राहाभिवाद्य च गुरुं श्रेय़ोर्थी विनय़ान्वितः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति