अनुशासन पर्व  अध्याय १४

उपमन्युरु उवाच

कृष्णपुच्छं महाकाय़ं मधुपिङ्गललोचनम् |  १०७   क
जाम्वूनदेन दाम्ना च सर्वतः समलङ्कृतम् ||  १०७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति