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शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
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भीष्म उवाच
पादशौचं तु कृत्वैव शुकः सन्ध्यामुपास्य च |  ४३   क
निषसादासने पुण्ये तमेवार्थं विचिन्तय़न् ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति