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शान्ति पर्व
अध्याय ३१३
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जनक उवाच
तमासाद्य तु मुक्तस्य दृष्टार्थस्य विपश्चितः |  २७   क
त्रिष्वाश्रमेषु को न्वर्थो भवेत्परमभीप्सतः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति