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शान्ति पर्व
अध्याय ३१३
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जनक उवाच
यदा भावं न कुरुते सर्वभूतेषु पापकम् |  ३४   क
कर्मणा मनसा वाचा व्रह्म सम्पद्यते तदा ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति