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शान्ति पर्व
अध्याय ३१३
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जनक उवाच
शीतमुष्णं तथैवार्थमनर्थं प्रिय़मप्रिय़म् |  ३८   क
जीवितं मरणं चैव व्रह्म सम्पद्यते तदा ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति