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शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
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भीष्म उवाच
यत्रोत्तरां दिशं गत्वा शैलराजस्य पार्श्वतः |  १८   क
तपोऽतप्यत दुर्धर्षस्तात नित्यं वृषध्वजः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति