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शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
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भीष्म उवाच
काङ्क्षामस्तु वय़ं सर्वे वरं दत्तं महर्षिणा |  ३७   क
षष्ठः शिष्यो न ते ख्यातिं गच्छेदत्र प्रसीद नः ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति