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शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
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भीष्म उवाच
सर्वप्राणभृतां प्राणान्योऽन्तकाले निरस्यति |  ४९   क
यस्य वर्त्मानुवर्तेते मृत्युवैवस्वतावुभौ ||  ४९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति