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शान्ति पर्व
अध्याय २४०
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व्यास उवाच
सृजते तु गुणानेक एको न सृजते गुणान् |  २०   क
पृथग्भूतौ प्रकृत्या तौ सम्प्रय़ुक्तौ च सर्वदा ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति