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शान्ति पर्व
अध्याय १७७
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भृगुरु उवाच
आप्याय़न्ते च ते नित्यं धातवस्तैस्तु धातुभिः |  ३९   क
आपोऽग्निर्मारुतश्चैव नित्यं जाग्रति देहिषु ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति