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शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
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भीष्म उवाच
क्षितिं वा देवलोकं वा गम्यतां यदि रोचते |  ६   क
अप्रमादश्च वः कार्यो व्रह्म हि प्रचुरच्छलम् ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति