शान्ति पर्व  अध्याय ३१६

नारद उवाच

अलं परिग्रहेणेह दोषवान्हि परिग्रहः |  २९   क
कृमिर्हि कोशकारस्तु वध्यते स्वपरिग्रहात् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति