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शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
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नारद उवाच
सर्वैरिहेन्द्रिय़ार्थैश्च व्यक्ताव्यक्तैर्हि संहितः |  ४६   क
पञ्चविंशक इत्येष व्यक्ताव्यक्तमय़ो गुणः ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति