शान्ति पर्व  अध्याय ३१५

भीष्म उवाच

आदर्शे स्वामिव छाय़ां पश्यस्यात्मानमात्मना |  २९   क
न्यस्यात्मनि स्वय़ं वेदान्वुद्ध्या समनुचिन्तय़ ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति