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शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
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नारद उवाच
नाश्रु कुर्वन्ति ये वुद्ध्या दृष्ट्वा लोकेषु सन्ततिम् |  १०   क
सम्यक्प्रपश्यतः सर्वं नाश्रुकर्मोपपद्यते ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति