menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
chevron_left
chevron_right
नारद उवाच
निमेषमात्रमपि हि वय़ो गच्छन्न तिष्ठति |  २२   क
स्वशरीरेष्वनित्येषु नित्यं किमनुचिन्तय़ेत् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति