शान्ति पर्व  अध्याय ३१७

नारद उवाच

अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः |  ३०   क
आत्मनैव सहाय़ेन यश्चरेत्स सुखी भवेत् ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति