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शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
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वैशम्पाय़न उवाच
एकव्यूहविभागो वा क्वचिद्द्विव्यूहसञ्ज्ञितः |  ५३   क
त्रिव्यूहश्चापि सङ्ख्यातश्चतुर्व्यूहश्च दृश्यते ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति